Tuesday, April 18, 2017

तलाक



Inspired by the lines of a famous Poet, please read my version of Talaak

तलाक

तलाक तो दे रहे हो मुझे गुरुर और  कहर  के साथ
मेरी जवानी भी लौटा दो मेरी मेहर के साथ

दिन लिए, महीने लिए, साल लिए
मेरी शाम भी वापस दे दो मेरी सहर के साथ

अब तिल तिल के जीने से क्या फायदा
साँसे मेरी लौटा दो एक बोतल ज़हर के साथ

तुम्हारा प्यार था मेरे जीवन की बारिश
अब खत्म हो गयीं सारी ख्वाहिश
अब ले गए हो अपनेपन की धुप
मोहब्बत की दोपहर के साथ

तुम्हारे कहते ही कि मैं तुम संग जी न सकूँगा
अब साथ चलोगी तो और थकुंगा
मेरे सपने बह गए जैसे कहीं
बदनसीबी की नेहर के साथ

तलाक तो दे रहे हो मुझे गुरुर और कहर के साथ

मेरा जवानी भी लौटा दो मेरी मेहर के साथ

-जितेश मेहता

Monday, March 27, 2017

गर्मी आने वाली है ........

गर्मी आने वाली है ........

फिर से कर लो सब तैयारी
गर्मी आने वाली है
सूरज तेज़ यूँ चमकेगा
जैसे आई दिवाली है

पानी की हर बूँद बचाना
मोती सा कीमती है
अभी अगर बर्बाद कर दिया
कई महीनो फिर दुर्गति है

बिजली अभी कम खर्चोगे
सबको पूरी मिल पाएगी
वर्ना कई शहरों-गाओं की
रौनक ही उड़ जायेगी

इस ग्रीष्म ऋतु आओ
कुछ ऐसा मिल करें यारों
जल को कंजूसी से खर्चें
खुशहाली फिर दिशा चारों

जितेश मेहता
Jitesh Mehta

Welcome Summer 2017

Saturday, March 11, 2017

Happy Holi

रंग डालो कोई भी
पर मन काला न रखना
प्रेम-भाईचारा फ़ैलाना
मस्ती का रंग चखना

मुँह से बस मोती ही बरसे
निकले न कोई गाली
नाचो जम के
गाओ मन से रंगों भरी कवाली

दोस्तों की टोली लेके कर दो शहर रंगीला
गन्दा मत करना परंतु हर कोना हो गीला
मस्ती ख़ुशी से भर जाए कल पूरे दिन की डोली
मेरी तरफ़ से हर भारतवासी को Happy Holi-

Monday, November 14, 2016

500-1000 kee Gullak

जिनके पास हैं
जमा करोड़ों उनका पता नहीं
हमने कुछ हज़ार की ख़ातिर
गुल्लक तोड़ दी

निकले बहुत सिक्के
नोट कुछ सौ कुछ दस के
हज़ार-पांच सौ की चाह में
बंद मटकी फ़ोड़ दी

Sunday, November 6, 2016

आई 'ठंडी'

चलो आख़िर गई अब गर्मी
उबलते दिन प्रचंड
शॉल, रज़ाइयां निकलेंगी 
फिर झूम के आई 'ठंड'

सिगड़ी सजेंगी गली मोहल्ले 
धुवां आँख को भाएगा 
धूप की किरणों का झमघट
अब तन को खूब सुहाएगा

धुंध ज़रा मुश्किल तो देगी
मज़ा मगर उसका भी है
चाय की चुस्की वो भी लेगा
जिसको चस्का न भी है

कहवा, चाय और कॉफ़ी की
बिक्री खूब बढ़ जानी है
ऐसा सब तो होना ही है
जब भी 'सर्दी' आनी है

पंखो को आराम मिलेगा
पूरा साल ही भागते हैं
देर तक वो सब सोयेंगे 
जल्दी जो भी जागते हैं 

फिर ऊन सी बर्फ खिलेगी
खूब 'हिमाला' चमकेगा
ठंडी हवाओं के स्पर्श से 
हर इक चेहरा दमकेगा

हाथ सेकते जगह-जगह पर
जनता पाई जायेगी
दुनिया भर के गर्म मुद्दों पर
हाथ सेक बतियेगी

सर्दी का मौसम ही अलग है
रूहानी अहसास सा है
इस साल गर्मी ज़्यादा थी
इस साल ये ख़ास सा है


सर्द ऋतू का स्वागत है- जितेश मेहता 
Welcome Winter Season - Jitesh Mehta



Wednesday, September 14, 2016

14th सितम्बर 2016 - हिंदी दिवस के उपलक्ष पर :


राष्ट्र भाषा का दिन है मित्रों
आज हिंदी दिवस है
देश को बांध रखा है इसने 
इसका अलग अपना रस है
खड़ीबोली सी बोली जाती
जैसे मन हो बोल लो
जो भी भाषा बोलो चाहे
हिंदी का रंग घोल लो
सदियों से कविता और गीतों
में मोती बन झूमी है
केवल भारत वर्ष में नहीं
कई देशों में घूमी है
हर भाषा की अपनी मस्ती
अपना एक प्रकार है
पर हिंदी हर दिशा में फैली
इतना बड़ा विस्तार है


हिन्दी प्रेमी - जितेश मेहता
14th सितम्बर 2016 - हिंदी दिवस के उपलक्ष पर :


राष्ट्र भाषा का दिन है मित्रों
आज हिंदी दिवस है
देश को बांध रखा है इसने 
इसका अलग अपना रस है
राज्य भाषा का अपना रूप है
मातृ भाषा का अपना रंग
इससे अलग कभी न होना
ये चलती हर वक़्त संग
खड़ीबोली सी बोली जाती
जैसे मन हो बोल लो
जो भी भाषा बोलो चाहे
हिंदी का रंग घोल लो
सदियों से कविता और गीतों
में मोती बन झूमी है
केवल भारत वर्ष में नहीं
कई देशों में घूमी है
हर भाषा की अपनी मस्ती
अपना एक प्रकार है
पर हिंदी हर दिशा में फैली
इतना बड़ा विस्तार है


हिन्दी प्रेमी - जितेश मेहता